हिंदी निबंध की पह्चान और निबंध कैसे लिखते है

आईये आज हम और आप मिल कर पुरानी बातो कि चर्चा करते है ! छात्र जीवन मे बहुत कुछ शिखने को मिलता है लेकिन हम सब उस वक्त इस लाभदायक समय को बहुत ही आसानी से जाने देते है ! ऐसे समय को हम एक ना समझ कि तरह जाने देते है और बाद मे सब केहते है को वो एक समय था कि किस तरह छात्र जीवन बीत गया है ! लेकिन हम सब उस समय को नही जान पाये कि छात्र जीवन है ही शिक्षा लेने के लिए !


छात्र के जो जीवन है वो बहुत ही अमुल्य है ! ऐसा समय बीत सो बीत गया वापस फिर कभी नही आयेगा ! पर इस जीवन मे जो कुछ शिखना चाहिए वो सब नही शिखते है और बाद सिर्फ पश्चाताप करते है ! कि कास ये सब शिख लेता उस समय …..
और आज की समय मे ऐसे ज्ञान की तलाश मे रह्ते है कि कहॉ से कुछ शिखे ! कभी किताबे पढ़ते है तो कभी नेट मे सार्च करते है और ऐसे ज्ञान की तलाश करते है !
तो चलिये इस बात को यही पर खतम करते है और इस् लेख की मैंन टोपिक पर आते है ! जैसे की आपने इस लेख की नाम पढ़ा है कि हिंदी निबंध की पह्चान और निबंध कैसे लिखते है ये उस वक्त से पढ़ते आ रहे है जब मै तीसरी कक्षा मे था ! और आज मे निबंध के कुछ बाते बताने वाला हु कि निबंध कैसे लिखा जाता है ! निबंध कि पुरी जानकारी आप यहा से पढ़िए !

निबंध का स्वरुप
हिंदी का निबंधशब्द अंग्रेजी के ‘Essay’ शब्द का हिंदी रुपान्तर है ! अंग्रेजी का ‘Essay’ शब्द फ्रेंच के ‘Essai” से बना है, जिसका अर्थ है To attempt अर्थात प्रयत्न करना ! निबंध मे निबंधकार अपने सहज, स्वाभाविक रुप को पाठक के समक्ष प्रकट करता है ! अत: आत्माभिव्यक्ति ही निबंध का प्रथम एवं अंतिम लक्ष्य है ! निबंध स्वच्छंद अभिव्यक्ति है ! इसमे न तो दुराव, संकोच होते है और न ही भय ! जो अनुभव किया जाता है उसे ही अभिव्यक्त कर दिया जाता है ! निबंध का सौंन्दर्य है प्रवाह ! इसके विषय की कोई सीमा रेखा नही है ! विश्व की किसी वस्तु को लक्ष्य कर निबंध रचना संभव है ! क्योकि विषय तो सिर्फ बहाना है, मुख्य लक्ष्य निबंध के माध्यम से आत्मप्रकाशन है !
निबंध की विशेषताएँ
निबंध की कुछ विशेषताएँ है जो पुरी तरह से ये शिक्षा देता है कि निबंध कैसे और किस चीज कि और निशाना कर निबंध लिखना चाहिए !


निबंध की प्रमुख चार विशेषताएँ है
  1. व्यक्तित्व का प्रकाशन
  2. संक्षिप्तता
  3. एक्सुत्रता
  4. अन्विति (Totality) का प्रभाव
अब इन चार प्रमुख विशेषताएँ को थोढ़ी विस्तार मे जानते है
1. निबंध मे निबंधकार पाठ्को मित्र की तरह खुलकर बाते करता है ! यह कारण है कि जो प्रसन्नता एवं चित्त जी शांति बाग मे घुमकर प्राप्त होती है वही शांति निबंध पढ़्ने पर प्राप्त होती है अत: निबंध की सर्वप्रथम विश्षेता है – व्यक्तित्व का प्रकाशन !
2. निबंध की दुसरी विशेषता है संक्षिप्तता ! निबंध जितना लघु होता है उसमे जितना कसाव होता है, उतना ही सघन अनुभुतियॉ होती है ! यह पाठक पर प्रत्य्क्ष प्रभाव डालता है ! निबंध की सफलता-श्रेष्ठता उसकी संक्षिप्तता है ! शब्दाडंबर निबंध को नीरस बना देता है !
3. श्रेष्ठ निबंध की तीसरी विशेषता है एकसुत्रता ! निबंध मे शब्द क्रम की एक योजना होनी चाहिए ! क्योकि उसमे भावो का आवेग होता है ! जैसे-तैसे शब्दो को रखना निबंध को निकृष्ठ बनाता है ! अत: निबंध मे एकसुत्रता आवश्यक है !
4. निबंध की अंतिम विशेषता है – अन्विति का प्रभाव ! जिस तरह अनेक पुष्प एक सुत्र मे आबद्ध होकर ही माला का सौन्दर्य ग्रहन करता है, ठीक उसी तरह निबंध के प्रत्येक विचार-चिंन्तन, प्रत्येक भाव तथा प्रत्येक आपस मे अंवित होकर समग्र प्रभाव की सृष्टि करते है !
निबंध की शैली
लिखने के लिए दो बातो की आवश्यकता होती है भाव एवं भाषा ! दोनो समान महत्व के है ! भाव एवं भाषा के समंवयन के तरीके को ही शैली कहा जाता है ! वस्तुत: जहॉ परिमार्जित भाव एवं परिमार्जित भाषा का मेल होता है, वही शैली बनती है ! अच्छी पाठको को भाव ह्र्दयंगम कराने मे मार्गदर्शक का कार्य करती है !
निबंध के प्रकार
निबंध के मुख्यत: तीन प्रकार है 1. भावात्मक  2. विचारात्मक तथा 3. वर्णनात्मक निबंध मे विचार की !
विचारात्माक निबंध का आधार चिन्तन है ! निबंधकार अपने चिन्तन के माध्यम से अपनी बात पाठको तक संप्रेषण करता है ! भावात्मक निबंध का मुलधार आवेग है ! ह्र्दय से ह्रदय की आत्मीयता स्थापित करना इस प्रकार के निबंधो का लक्ष्य है ! वर्णनात्माक निबंध मे किसी स्थान,क्रिया-कलाप या घटना का आंखो देखा वर्णन महत्वपुर्न होता है !
सर्वोत्तम निबंध की पह्चान
सर्वोत्तम निबंध तो बिजली की ऐसी कौध है जो क्षणभर मे ही अपने आलोक से पाठक के मन के अंधकार को दुर कर दे ! मलय पर्वत से चलने वाली वह बयार है जो अपनी मदमस्थ खुशबु से पाठक के मन को तिरोहित कर दे ! प्रज्वलित अग्नि की वह ज्वाला है जो पाठक के ह्र्दय विचारो की ज्वाला मे घी दे दे ! निबंध वह वीणा का वह तार है जो पाठक के ह्रदय को झंकृत कर दे ! यह वह विशाल पत्थर है जो पाठक के ह्रदय रुपी स्तब्ध का अविनाशी भंडार हो मन का द्वार उन्मुक्त हो विश्लेषणात्मक द्क्षता हो तो वह निबंध लेखन मे निश्चय ही यशोलाभ करेगा !


निबंध कैसे लिखता है
किसी विषय पर निबंध लिखने से पुर्व उसकी सम्पुर्ण सामग्री एक्त्र कर लेना चाहिए ! निबंध के प्रथम चरन मे परिचय दुसरे मे आकार, प्रकार, तीसरे चरण मे लाभ, चौथे चरण मे हानि तथा पॉचवे चरन मे उपसंहार का समावेश होना चाहिए !
क्योकि चरनबद्ध ढंग से लिखे गये निबंध अधिक स्पष्ट तथा सुबोध होते है ! निबंध मे अधिक पेंचीदी बातो का समावेश नही करना चाहिए ! क्लिष्ट (कठिन) भाषा का प्रयोग भी पाठक के मन मे अरुचि पैदा करता है !
निबंध किसी भी चीज का लिखा जा सकता है जैसे-
किसी महान आदमी के बारे मे
  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  • सरदार बल्लभ भाई पटेल
  • डॉ. भीमराव अम्बेदकर
  • डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
  • लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै
किसी पर्व के बारे मे
किसी पक्षी या जानवर के बारे मे भी निबंध लिख सकते है . जैसे-


  • गाय
  • हाथी
  • मोर
  • कबुतर

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Suraj Barai

I am Suraj Barai Founder of HindiMeShiksha.Com Me Hu Ek Hindi Blogger. Mujhe Khusi Tabhi Hota Hai Jab Mere Likhe Gaye Article Se Kisi Ko Help Milta Hai. Thanks.

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